આજ નો દિવસ : વિક્રમ સંવત   ૨૦૭૩  ( નેમિસૂરિ સંવત  ૬૮ )  શ્રાવણ વદ અગિયારશ શુક્રવાર   Dt: 18-08-2017



મરનારની ચિતા પર ચાહનાર કોઈ ચડતું નથી, કહે છે હું મરી જઈશ પાછળથી કોઈ મરતું નથી, બળતા જોઈ એના દેહને એની આગમાં કોઈ પડતું નથી, અરે આગમાં તો શું એની રાખને કોઈ અડતું નથી…

पदमावती चिंतन - ओली आराधना दिवस में -

प्रथम दिवस अरिहंतपद आराधना

अरिहंत पद ध्यातोथको दव्वह गुण पजायरे

भेद छेद करी आतमा अरिहंत रुपी थाय रे

                                        विर जिनेश्वर उपदिशे,तुमे  सांभलजो चित्त लाईरे 

                                         आतम ध्याने आतमा ऋद्धि मले सवि आई रे ।

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अरिहंत पद के बारह गुण -

१.   अशोक वृक्षप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

२.   पुष्पवृष्टिप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

३.   दिव्यध्वनिप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

४.   चामरयुग्मप्रातिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

५.   स्वर्णसिंहासनप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

६.   भामण्डलप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

७.   दुन्दुभिप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

८.   छत्रत्रयप्रतिहार्य संयुताय श्री अरिहंताय नमः

९.   ज्ञानातिशय संयुताय श्री अरिहंताय नमः

१०.पूजातिशय संयुताय श्री अरिहंताय नमः

११.वचनातिशयसंयुताय श्री अरिहंताय नमः

१२.    आपायापगमातिशय संयुताय श्री अरिहंताय नमः

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श्री अरिहंत पद चैत्यवंदन

 जय जयश्री अरिहंतभानु, भवि कमल विकाशी,

लोकालोक अरुपी रुपी,    समस्त वस्तु प्रकाशी ।। १ ।।

समुद्घातत शुभ केवले, क्षय कृत मल राशि;

शुक्ल अमर शुचि पादसे, भयो वर अविनाशी ।। २ ।।

अन्तरंग रिपुगण हणीए, हुय अप्पा अरिहंतं;

तसु पद पंकज में रही, हीर धरम नित संत ।। ३ ।।

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श्री अरिहंत पद - स्तवन

त्रीजे भव विधिसहितथी, वीश स्थानक तप करीने रे,

गोत्र तीर्थड्कर बांधीयु, समकित शुद्ध मन धरीने रे           १

अरिहंत पदनित वंदीए, करमकठिन जीम छंडीए रे । ए अंकणी

जन्म कल्याणकने दिने, नारकी सुखीया थाये रे,

मति श्रुत अवधि विराजता, जसु योपम कोई नावे रे अ.               २

दीक्षा लीधी शुभ मने, मनः पर्यव आदरीयुं रे,

तप करी कर्म खपाई ने, ततखिण केवल वरीयुं रे । अ.                  ३

तीश करी कर्म खपाई ने, ततखिण केवल वरीयुं रे,

देश दोष रहित थइ, पूरे संग जगीशो रे । अ.                              ४

मन वरण लगाई ने, अरिहंतपद आराधे रे,

नर विश्चयथी सही, अरिहंतपदवी साधे रे । अ.                 ५

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श्री अरिहंत पद स्तुति

सकल द्रव्य पर्याय प्ररुपक, लोकालोक सरुपोजी;

केवल ज्ञानकी ज्योति प्रकाशक, अनंत गुणे करी पूरोजी

त्रीजेभव स्थानक  आराधी, गोत्र तीर्थंकर नूरोजी,

वारगुणाकर एहवा अरिहंत आराधो गुण भुरोजी,

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द्वितिय दिवस ः

सिद्धपद आराधना ।।

रुपातीत स्वभाव जे,

केवल दंसण नाणी रे,

दे ध्याता निज आतमा,

होय सिद्ध गुणखाणी रे,

वीर जिनेश्वर उपदिशे,

तुमे सांभलजो चित्त लाईरे ।

आतम ध्याने आतमा,

ऋद्धि मले सवि आई रे ।

 

सिद्धपद के आठ गुण ः-

१.   अनन्तज्ञानसंयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

२.   अनन्तदर्शनसंयुक्ता श्री सिद्धाय नमः

३.   अव्यावागुणसंयुंक्ताय श्री सिद्धाय नमः

४.   अनन्तचारित्रगुणसंयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

५.   अक्षयस्थितिगुणसंयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

६.   अरुपीनिरंजनगुणसंयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

७.   अगुरुलधुगुणसंयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

८.   अनन्तवीर्य संयुक्ताय श्री सिद्धाय नमः

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श्री सिद्धपद चैत्यचंदन

श्री शैलेशी पूर्व प्रांत, तनु हीन त्रिभागी,

पुव्वपओग पसंगसे, अरध गण जागी,                    १

समय का एक में लोकप्रांत, गये निगुण निरागी

चेतन भूपे आत्मरुप, सुदिशा लही सागी,               २

केवल दंसण नासथीए, रुपातीत स्वभाव,

सिद्धभये जसु हीरधर्म, वदे धरी शुभ भाव,            ३

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श्री सिद्धपद - स्तवन

सकल करमनो क्षय करी, सिद्ध अवस्था पाई रे,

गुण इथतीस विराजता, ओपम जस नहीं कांई रे ।

मन शुद्ध सिद्धपद वंदीए-ए आंकणो,                    १

जनम मरण दुःख निगम्यां, शुद्धातन विद्रुपी रे;

अनंत चतुष्टय धारता, अव्याबाध अरुपी रे मन       २

जास ध्यान जोगीसरु, करे अजपा जापे रे,

भव भव संच्यां जीवडे, कठिण करम ते कापे रे, मन.          ३

ध्यान धरंतां सिद्धनु, पूजतां मनरागे रे;

अविचल पदवी पाइ ए, कह्यं जीनवर वड भागे रे. मन.      ४ 

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श्री सिद्धपद - स्तुति

अष्ट करमकुं दमन करीने, गमन कियो शिववासीजी,

अव्याबाध आदि अनादि, चिदानंद चिदराशिजी,

परमातम पद पूरण विदासी, अधधन दाघ विनाशीजी,

अनंत चतुष्टय विशपद ध्यावो, केवलज्ञानी भाषी जी,

श्री आचार्य पद आराधना तृतीय दिवस

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श्री आचार्य पद आराधना विधि

ज्याता अचरज भला, महामंत्र शुभ ध्यानी रे ।

पंच अचरज आतमा, आचारज होय प्राणी रे ।

वीर जिनेश्वर उपदिशे, तुमे सांभलजो चित लाई रे

आतम ध्याने आतमा, ऋद्धि मले सवि आई रे ।

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आचार्य पद के ३६ गु

१.                                                                           

२.   सूर्यवत्ततेजविस्वगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

३.   युगप्रधानागमसंयुताय श्री आचार्याय नमः

४.   मधुरवाक्यगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

५.   गाम्भीर्यगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

६.   धैर्यगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

७.   उपदेशगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

८.   अपरिश्राविगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

९.   सौम्यप्रकृतिगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१०.    शीलगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

११.    अविग्रहगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१२.    अविकथकगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१३.    अचलपलगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१४.    प्रसन्नवदनगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१५.    क्षमागुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१६.    ऋजुगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१७.    मृदुगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१८.    सर्वाड्कःमुक्तिसंयुताय श्री आचार्याय नमः

१९.    द्वादशविधतपोगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

२०.    सप्तदशविधसयमगुणसंयुताय श्री आचार्यय नमः

२१.    सत्यव्रतगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

२२.    शौचगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

२३.    अकिग्चनगुणसंयुताय श्री आचार्याय नमः

२४.    ब्रह्मचर्यगुणसंयुक्ताय श्री आचार्याय नमः

२५.    अनित्यभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

२६.    अशरणभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

२७.    संसारस्वरुपभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

२८.    एकत्वभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

२९.    अन्यत्वभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३०.    अशुचिभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३१.    आश्रवभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः  

३२.    संवरभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३३.    निर्ज्जराभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३४.    लोकस्वरुपभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३५.    बोधिदुर्लभभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

३६.    धर्मदुर्लभभावनाभावकाय श्री आचार्याय नमः

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श्री चार्यपद चैत्यवंदन

जिनपद कुल मुखरस अनिल, मितरस गुण सारी,

प्रबल सबल धन मोहकी, जिण ते चमु हारी । १

रुज्वादिक जिनराज गीत, नयतक विस्ताीर,

भवकुपे पाये पडत, गजनन निस्तारी । २

पंचाचारी जीवके, आचारज पद सार,

तीनकुं वदे हीरधर्म, उट्ठोत्तरसो वार । ३.    

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श्री आचार्य पद - स्तवन

गुण छत्तीशे दीपता, पाले पांच आचारो रे,

जिन मारगा साचो कहे, युग प्रधान जयकारो रे । १

आचारज पद वंदीए -ए आंकणी ।

सारण बारण चोयणा, पडिचोयणा चउ शीक्षा रे,

भव्य जीव समजाववा, देवाने ते दक्षा रे ।              अ.२

जिनवर सूरज आथभ्या, परतख दीपक जेहा रे,

सकल भाव परगट करे, ज्ञानमगी जसु देहा ने । आ. ३

विधिशुं पूजा साचवे, ध्यावे निज हित जाणी रे

पावे लगुअर कालमां, आचारज पद प्राणी रे । आ. ४

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श्री आचार्यपद - स्तुति

पंचाचार पाले उजवाले, दोष रहित गुणधारीजी

गुण छत्तीसे, आगमधारी, द्वादश, अंग विचारीजी

प्रबल धनमोह हरणकं, अनिल सभी गुण वाणीजी,

क्षमा सहित जे संयम पाले, आचारज गुणध्यानीजी,

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उपाध्याय पद आराधन

तप सज्झाये रत सदा, द्वादश अंगजो ध्याता रे ।

उपाध्याय ते आतमा, जगबंधन जगभ्राता रे ।

वीर जिनेश्वर उपदिशे, तुमे सांभलजो चितलाई रे ।

आतम ध्याने आतमा, ऋद्विमले सवि आई रे ।

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उपाध्याय पद के २५ गुण ः -

१.   श्री आचाराङ्गसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२.   श्री सूत्रकृताङ्गसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

३.   श्री स्नानाङ्गसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

४.   श्री समवायाङ्गसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

५.   श्री भगवतीसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

६.   श्री ज्ञातासूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

७.   श्री उपासकदशासूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

८.   श्री अन्तकृदुशासूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

९.   श्री अनुत्तरोपपतिकसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१०.    श्री प्रश्नव्याकरणसूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

११.    विकाससूत्रपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१२.    उत्पादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१३.    आग्रायणीयपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१४.    वीर्यपवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१५.    अस्तिप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१६.    ज्ञानप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१७.    सत्यप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१८.    आत्मप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

१९.    कर्मप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२०.    प्रत्याख्यानप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२१.    विद्याप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२२.    कल्याणप्रवादपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२३.    प्रणावायपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२४.    क्रियाविशालपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

२५.    लोकबिन्दुसारपूर्वपठनगुणयुक्ताय श्री उपाध्यायाय नमः

श्री उपाध्यापद चैत्यवंदन

धनधन श्रीउवज्झाय राय, शठता धन भंजन;

जिवर दिसत दुवासंग, दुरकृत जनरंजन.      १

गुणवर भंजण मणगयंद, सुय शणि कियगंजण,

कुणालंध लोय लोयणे, जथ्थय सुयभंजण.    २

महाप्राणमें जिन लह्योए आगमसे पद तुर्य,

तीन ये अहिनश हीरधर्म, वंदे पाठकवर्य.      ३

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श्री उपाध्यायपद - स्तवन

द्वादशांगी वाणी वडे, सूत्र अर्थ विस्तारेरे,

पंच वरग गुण जेहना, समिति गुप्तिनित धारे रे,      १.

श्री उवज्झाया वंदीए-ए आंकणी,

दायक आगम वाचना, भेद भाव युत सारी रे,

भूखकूं पंडित करे जगज्जन्तु हितकारीरे.                श्री २.

शीतलचंद किरण सभी, वाणी जेहनी कहीए रे,

ते उवज्झाया पूजतां, अविचल सुखडां लहीए रे      श्री ३.

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श्री उपाध्याय पद स्तुति

अंग इग्यारे चउदे पूरव, गुण पंचवीशना धारीजी,

सूत्र अश्थधर पाठक कहीए, जोग समाधि विचारीजी,

तप गुण शूरा आगम पूरा, नय निक्षेपे तारीजी,

मुनि गुणधारी बुध विस्तारी पाठक पूजो विकारी जी,

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पंचम दिवस -पद आराधन