આજ નો દિવસ : વિક્રમ સંવત   ૨૦૭૪  ( નેમિસૂરિ સંવત  ૬૯ )  કારતક સુદ ત્રીજ રવિવાર   Dt: 22-10-2017



વિધીની સાથે વેર ન થાય, જીવન આખું ઝેર ન થાય, નસીબ છાપેલો કાગળ છે, તેમાં કદી ફેર ન થાય…

तपश्चरण की विधि

तीर्थंकर-गोत्रतप

(बीस स्थानक तप)

तीर्थंकर गोत्र के बीस बोल बताए हैं । उनके तप का जैन-संसार में बहुत प्रचलन है । बीस स्थानक तप की बीस ओली पूर्ण करनी होती है । एक ओली में बीस पद की आराधना करनी चाहिए । जिस दिन पद की आराधना करे, उस दिन ब्रह्मचर्य से रहना चाहिए और जमीन पर सोना चाहिए । शक्ति हो तो उपवास करें, अन्यथा आयंबिल या एकासन करें । जिस दिन जिस पद की आराधना हो, उस दिन नीचे लिखे अनुसार उसी पद की आराधना हो, उस दिन नीचे लिखे अनुसार उसी पद की बीस माला फेरें । यह तप महान है । शुद्ध आराधना होने से तीर्थङ्कर गोत्र का बंध हो, तीसरे भव में मोक्ष प्राप्त हो । माला-जप का क्रम इस प्रकार है -

१. नमो अरिहंताणं    २. नमो सिद्धाणं

३. नमो पवयणस्स     ४. नमो आयरियाणं

५. नमो थेराणं         ६. नमो उवज्झायाणं

७. नमो लोए सव्वसाहूणं   ८. नमो नाणरस

९. नमो दंसणस्स      १०. नमो विनय सम्पन्नाणं

११. नमो चरित्तस्य   १२. नमो बंभवयधारीणं

१३. नमो किरियाणं   १४. नमो तवस्सीणं

१५. नमो गोयमस्स   १६. नमो जिणाणं

१७. नमो चरणस्स    १८. नमो अपुव्वनाणस्स

१९. नमो सुयनाणस्स२०. नमो तित्थस्स

सूचना ः कुछ पुराने ग्रन्थों में उपर्युक्त जप के पहले ॐ ह्रीँ का भी उल्लेख मिलता हैः जैसे ॐ ह्रीँ नमो अरिहंताणं, ॐ ह्रीँ नमो सिद्धाणं इत्यादि ।

अष्टकर्मसूदन तप

१. ज्ञानावरणीय ः एक उपवास का तप । पांच लोगस्स का ध्यान ।

ॐ ह्रीँ अनन्त-ज्ञानगुणेभ्यो नमः - इस मन्त्र की बीस माला फेरनी चाहिए ।

२. दर्शनावरणीय ः एकासणा । नौ लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अनन्त-दर्शनगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

३. वेदनीय ः एकलसिथं (एक अन्न का दाना ही खाना, शेष तप ।) दो लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अव्याबाधगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

४. मोहनीय ः एकलठाणा (एक बार और एक साथ एक आसन से ही आहार तथा जल ग्रहण करना) । अठाईस लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ यथाख्यातगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

५. आयुकर्म ः एकदत्ति (एक बार में एक साथ जो मिले वही खाना-दुबारा नहीं लेना) चार लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अक्षयनिधिगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

६. नामकर्म ः निवी (घी, दूध और नमक से रहित रखा खाना) एक सौ तीन लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अरुपिगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

७. गोत्रकर्म ः आयंबिल । दो लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अगुरुलघुगुणेभ्यो नमः की बीस माला।

८. अन्तराय-अष्ट कवल (सिर्फ आठ कोर अर्थात् ग्रास खाना) पांच लोगस्स का ध्यान । ॐ ह्रीँ अनन्त-वीर्यगुणेभ्यो नमः की बीस माला ।

रोहीणी तप

सत्ताईस नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र रोहिणी है । यह नक्षत्र महीने में जिस दिन हो, उस दिन उपवास करें और वासुपूज्य-स्वामी की तीन बार भाववन्दना करके ॐ ह्रीँ वासुपूज्यजिनाय नमः - इस मन्त्र की बीस माला फेरें । इस प्रकार सात वर्ष और सात महीने तक यह तप किया जाता है । रोहिणी तप स्त्रियां करती है । इस तप की आराधना करने से मन की अभिलाषा पूर्ण हो, सौभाग्य की वृद्धि हो, पुत्रादि के अभाव का शोक दूर हो ।

वर्धमान आयंबिल तप

प्रथम एक आयंबिल करे और ऊपर एक उपवास फिर दो आयंबिल और ऊपर एक उपवास, फिर तीन आयंबिल और ऊपर एक उपवास-इस क्रम से बढते बढते सौ आयंबिल और ऊपर एक उपवास करें । इस तप में हिसाब से कुल सौ उपवास और पांच हजार पचास आयंबिल होते है । इस तप में तप के दिन ॐ ह्रीँ नमो जिणाणं की बीस माला जपनी चाहिए । बारह लोगस्स का ध्यान करें ।

ज्ञान-पंचमी तप

कार्तिक सुदी पंचमी से यह तप शुरु किया जाता है । हर एक महीने की सुदी पंचमी को उपवास करते हुए पांच वर्ष और पांच मास में पैंसठ उपवास होते हैं । इस तप में उपवास के दिन ॐ ह्रीँ नमो नाणस्स इस मन्त्र की बीस माला फेरनी चाहिए । और इक्कावन लोगस्स का ध्यान करना
चाहिए ।

पौष दशमी तप

पौष वदी दशम के पहले दिन यानी नवमी के दिन शक्कर के पानी का एकासणा करें, यानी उस दिन सिर्फ गर्म जल में शक्कर डाल कर एक बार पीवें । बाद में दशमी के दिन एकलठाणा यानी भोजन तथा जल एक साथ एक आसन से ही लेवें और फिर चउविहार कर लें । फिर एकादशी के दिन नवमी के समान शक्कर के पानी का एकसणा कर को तीनों दिन ब्रह्मचर्य से रहें, जमीन पर सोऐं और यदि प्रतिक्रमण आता हो तो सुबह-शाम प्रतिक्रमण भी करें । तीनों दिन प्रतिदिन ॐ ह्रीँ श्री पार्श्वनाथाय अर्हते नमः इस मन्त्र की बीस माला फेरें । फिर हर महीने की वदी दशमी को उपवास या एकलठाणा करते रहें । यह तप दस वर्ष में पूर्ण होता है ।

पंचरंगी तप

इस तप में २५ पुरुष अथवा २५ स्त्रियां होती है ।

पहले दिन पांच जने पाँच-पाँच उपवास यानी पचौलो करे । प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति मतिज्ञानाय नमः पद की दस माला फेरे । अठाईस लोगस्स का ध्यान करें ।

दूसरे दिन पांच जने चार-चार उपवास यानी चौसा करें और प्रतिदिन श्रुतज्ञानाय नमः पद की बीस माला फेरे । चौदह लोगस्स का ध्यान करें ।

तीसरे दिन ः पाँच जने तीन-तीन उपवास यानी तेला करें और प्रतिदिन अवधिज्ञानाय नमः पद की २० माला फेरे तथा छह लोगस्स का ध्यान करें ।

चौथे दिन ः पांच जने दो-दो उपवास यानी बेला करें और मनःपर्यायज्ञानाय नमः पद की बीस माला फेरे । दो लोगस्स का ध्यान करें ।

पांचवे दिन ः पांच जने एक-एक उपवास करें और केवलज्ञानाय नमः इस पद की बीस माला फेरें । तथा एकलोगस्स का ध्यान करें ।

पाक्षिक तप

किसी भी महीने की शुक्ल प्रतिपदा (सुदी एकम) से ले कर पूर्णिमा तक लगातार पन्द्रह उपवास करने का नाम पाक्षिक तप है । यदि किसी साधक को लगातार पन्द्रह उपवास करने की शक्ति न हो, तो किसी एक महीने के पहले शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को एक उपवास करे, फिर दूसरे शुक्लपक्ष की दूज को, फिर तीसरे शुक्लपक्ष की तीज को इस प्रकार एक एक करके पन्द्रह शुक्लपक्ष में पन्द्रह उपवास करे । प्रत्येक उपवास में श्रीमुनि-सुव्रतसर्वज्ञाय नमः - इस मन्त्र की २० माला फेरे ।

वर्षीतप

वर्षीतप में तीन-सौ साठ उपवास करने होते हैं । जिस दिन उपवास हो उस दिन प्रतिक्रमण, स्वाध्याय, दान अवश्य करें । तप का प्रारम्भ वैशाख सुदी तीज से करें और एक दिन उपवास और अगले दिन पारणा, इस प्रकार दो वर्ष में तीन-सौ साठ उपवास करने के बाद, अन्तिम पारणा इक्षुरस से वैशाय सुदी तीज को करे । उपवास के दिन श्रीऋषभदेव-तीर्थंकराय नमः इस मन्त्र की २० माला फेरें ।

अकषाय तप

सोलह कषाय की निवृत्ति के लिए पहले दिन एकासणा, दुसरे दिन नीवी, तीसरे दिन आयंबिल और चौथे दिन उपवास करें । इस प्रकार अनुक्रम से चार बार करने से सोलह दिन में अकषाय तप पूर्ण होता है । प्रत्येक दिन ॐ श्रीं क्षीणकषायवीतरागाय नमः मन्त्र की २० माला फेरनी चाहिए।

चौवीस तीर्थंङ्कर कल्याणक तप

कार्तिक मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

३        वदि ५   केवलज्ञान   श्रावस्ती

२२     वदि १२    च्यवन     सौरिपुर

६       वदि १२     जन्म      कौशांबी

६    वदि १३ (१२)दीक्षा     कौशाम्बी

२४     वदि ३०     मोक्ष     पावापुरी

९      सुदि ३ (२)   केवल     काकन्दी

१८     सुदि १२     केवल    हस्तिनापुर

मगसर मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

९        वदि ५      जन्म      काकंदी

९        वदि ६      दीक्षा     काकन्दी

२४     वदि १०     दीक्षा     कुंडलपुर

६       वदि ११     मोक्ष   सम्मेतशिखर

१८     सुदि १०     जन्म    हस्तिनापुर

१८     सुदि १०     मोक्ष   सम्मेतशिखर

१८     सुदि ११     दीक्षा    हस्तिनापुर

१९     सुदि ११     जन्म      मिथिला

१९     सुदि ११     दीक्षा     मिथिला

१९     सुदि ११     केवल     मिथिला

२१     सुदि ११     केवल     मिथिला

३       सुदि १४     जन्म      श्रावस्ती

३       सुदि १५     दीक्षा     श्रावस्ती

पौष मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

२३     वदि १०     जन्म     वाराणसी

२३     वदि ११     दीक्षा     वाराणसी

८       वदि १२     जन्म      चन्द्रपुरी

८       वदि १३     दीक्षा     चन्द्रपुरी

१०     वदि १४     केवल    भद्दिलपुर

१३      सुदि ६      केवल     कंपिलपुर

१६      सुदि ९      केवल    हस्तिनापुर

२       सुदि ११     केवल     विनीता

४       सुदि १४     केवल     अयोध्या

१५     सुदि १५     केवल      रत्नपुर

माघ मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

६        वदि ६     च्यवन    कौशाम्बी

१०     वदि १२     जन्म     भद्दिलपुर

१०     वदि १२     दीक्षा     भद्दिलपुर

१       वदि १३     मोक्ष   कैलाश पर्वत

११     वदि ३०     केवल      सिंहपुर

४        सुदि २      जन्म      अयोध्या

१२      सुदि २      केवल       चम्पा

१५      सुदि ३      जन्म       रत्नपुर

१३      सुदि ३      जन्म    कांपिल्यपुर

१३      सुदि ४      दीक्षा    कांपिल्यपुर

२        सुदि ८      जन्म      अयोध्या

२        सुदि ९      दीक्षा     अयोध्या

४       सुदि १२     दीक्षा     अयोध्या

१५     सुदि १३     दीक्षा      रत्नपुर

फागुन मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

७        वदि ६      केवल    वाराणसी

७        वदि ७       मोक्ष   सम्मेतशिखर

८        वदि ७      केवल     चन्द्रपुरी

९        वदि ९     च्यवन     काकन्दी

१       वदि ११     केवल    पुरिमताल

२०     वदि १२     केवल      राजगृह

११     वदि १२     जन्म      सिंहपुर

११वदि १३ (३०)दीक्षा      सिंहपुर

१२     वदि १४     जन्म       चम्पा

१२     वदि ३०     दीक्षा       चम्पा

१८   सुदि २ (१)   च्यवन   हस्तिनापुर

१९      सुदि ४     च्यवन     मिथिला

३        सुदि ८     च्यवन     श्रीवस्ती

२०     सुदि १२     दीक्षा     राजगृही

१९     सुदी १२     मोक्ष   सम्मेतशिखर

चैत्रमास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

२३      वदि ४     च्यवन    वाराणसी

२३      वदि ४      केवल   आमलकवृक्ष

८        वदि ५     च्यवन     चन्द्रपुरी

१        वदि ८      जन्म      विनीता

१      वदि ९ (८)   दीक्षा      विनीता

१७      सुदि ३      केवल    हस्तिनापुर

१९      सुदि ४      मोक्ष   सम्मेतशिखर

१४      सुदि ५      मोक्ष   सम्मेतशिखर

२        सुदि ५      मोक्ष   सम्मेतशिखर

३        सुदि ५      मोक्ष   सम्मेतशिखर

५        सुदि ९      मोक्ष   सम्मेतशिखर

५       सुदि ११     केवल     अयोध्या

२४     सुदि १३     जन्म     कुण्डलपुर

६       सुदि १५     केवल     कौशाम्बी

वैशाखमास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

१७      वदि १       मोक्ष   सम्मेतशिखर

१०      वदि २       मोक्ष   सम्मेतशिखर

१७      वदि ५      दीक्षा    हस्तिनापुर

१०      वदि ६     च्यवन    भद्दिलपुर

२१     वदि १०     मोक्ष   सम्मेतशिखर

१४     वदि १३     जन्म      अयोध्या

१४     वदि १४     दीक्षा     अयोध्या

१४     वदि १४     केवल     अयोध्या

१७     वदि १४     जन्म    हस्तिनापुर

४        सुदि ४     च्यवन     अयोध्या

१५      सुदि ७     च्यवन     अयोध्या

४        सुदि ८      मोक्ष   सम्मेतशिखर

५        सुदि ८      जन्म      अयोध्या

५        सुदि ९      दीक्षा     अयोध्या

२४     सुदि १०     केवलऋजुबालिका-तट

१३     सुदि १२    च्यवन   कांपिल्लपुर

२       सुदि १३    च्यवन     अयोध्या

जेठ मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

११      वदि ६     च्यवन     सिंहपुर

२०      वदि ८      जन्म      राजगृह

२०      वदि ९       मोक्ष   सम्मेतशिखर

१६     वदि १३     जन्म    हस्तिनापुर

१६     वदि १३     मोक्ष   सम्मेतशिखर

१६     वदि १४     दीक्षा    हस्तिनापुर

१५      सुदि ५      मोक्ष   सम्मेतशिखर

१२      सुदि ९     च्यवन      चम्पा

७       सुदि १२     जन्म     वाराणसी

७       सुदि १३     दीक्षा     वाराणसी

आषाढ मास

तीर्थंकर   तिथि     कल्याणक    स्थान

१        वदि ४     च्यवन     विनिता

१३      वदि ७       मोक्ष   सम्मेतशिखर

२१      वदि ९      दीक्षा     मिथीला

२४      सुदि ६     च्यवन    क्षत्रियकुंड

२२      सुदि ८      मोक्ष      गिरनार

१२     सुदि १४     मोक्&